मण्डलीय आर्य वीरांगना व्यक्तित्व विकास शिविर एवं राष्ट्रीय आर्य पुरोहिता / उपदेशिका प्रशिक्षण शिविर
मण्डलीय आर्य वीरांगना व्यक्तित्व विकास शिविर एवं राष्ट्रीय आर्य पुरोहिता / उपदेशिका प्रशिक्षण शिविर
आगामी कार्यक्रम
मण्डलीय आर्य वीरांगना व्यक्तित्व विकास शिविर एवं राष्ट्रीय आर्य पुरोहिता / उपदेशिका प्रशिक्षण शिविर
#यज्ञ_विधि_पुस्तक_विमोचन ——- वडोदरा ( गुजरात ) निवासी देवता स्वरूप, ऋषि भक्त डॉ॰ #भगवान_स्वरूप_वानप्रस्थी एवं माता श्रीमती #योगेश्वरी_देवी_वानप्रस्था जी की प्रेरणा से आर्य जगत के प्रसिद्ध विद्वान स्मृतिशेष श्री #कान्तीलाल_गौड़ एवं स्मृतिशेष माता श्रीमती #शान्ति_गौड़ जी की स्मृति में जर्मनी निवासी उदारमना, धार्मिक एवं विद्वान पिता के सुयोग्य सुपुत्र श्रीमान् #विवेकशील_गौड़ सहधर्मिणी श्रीमती #ऋचा_गौड़ जी के…
वैदिक विधि से विवाह संस्कार वैदिक विधि से विवाह संस्कार कराने के लिए सम्पर्क करें – आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री( वैदिक प्रवक्ता, लेखक एवं मिशनरी प्रचारक ) संचालक – महर्षि दयानन्द योगपीठ ट्रस्ट आगरावरिष्ठ सहसंचालक – आर्य वीर दल उत्तर प्रदेशवरिष्ठ उपप्रधान – सार्वदेशिक आर्य पुरोहित सभा सम्पर्क सूत्र –98970608229411082340 वेबसाइट —- https://maharshidayanandyogpeeth.com विवाह संस्कार के…
आर्य पुरोहित/उपदेशक प्रशिक्षण महर्षि के सशक्त सैनिक तैयार करने के लिए आर्य पुरोहित/उपदेशक प्रशिक्षण का यह विशेष कार्य किया जारहा है। गुरुकुल में पढ़ रहे या पढ़कर अपने जीवन यापन के लिए किसी भी पुरुषार्थ पूर्ण कार्य को कर रहे उन सभी ब्रह्मचारियों और महानुभावों से निवेदन है कि महर्षि के कार्य के लिए भी…
नमस्ते जी आर्य समाज सान्ताक्रुज, मुम्बई अनेक वर्षों से विद्वानों/प्रचारकों/विशेष कार्यकर्ताओं का सम्मान करता आरहा है। इस बार भी आपके द्वारा विद्वानों को सम्मानित किया गया है। उनमें से मेघजी भाई साहित्य पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए मैं आर्य समाज सान्ताक्रुज, मुम्बई और श्री मेघजी भाई जी के परिवार का धन्यवाद करता हूँ ।…
🌍 महर्षि दयानन्द योगपीठ न्यास द्वारा ऋषि मिशन – कृण्वन्तो विश्वमार्यम् के लिए योजनाबद्ध निरन्तर किये जा रहे कार्य 🌎 नमस्ते जी 👉 महर्षि दयानन्द सरस्वती के द्वितीय जन्म शताब्दी वर्ष एवं आर्य समाज की स्थापना के १५० वें वर्ष के पावन अवसर पर महर्षि दयानन्द योगपीठ द्वारा जनपद आगरा के विभिन्न विद्यालयों में सामान्य…
संसार का प्रथम गुरू, आचार्य और उपदेशक परमेश्वर है। परमेश्वर से ज्ञान प्राप्त करके मनुष्यों में यह मार्गदर्शन की श्रृंखला अग्नि, वायु, आदित्य और अङ्गिरा ऋषियों से आरम्भ हुई है।