आप जो भी करें उसका दूरगामी परिणाम अवश्य ध्यान में रखें
आप जो भी करें उसका दूरगामी परिणाम अवश्य ध्यान में रखें मनुष्य का प्रत्येक विचार,…
अग्निहोत्र – अग्नये परमेश्वराय जलवायुशुद्धिकरणाय च होत्रं हवनं यस्मिन कर्मणि क्रियते तदग्निहोत्रम्।
अग्नि वा परमेश्वर लिए जल और पवन की शुद्धि वा ईश्वर की आज्ञा पालन के अर्थ होत्र जो हवन अर्थात् दान करते हैं , उसे अग्निहोत्र कहते हैं।
ओ३म् भूर्भुवःस्वः।तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्।।
नमस्ते जी! सादर निवेदन है कि महर्षि दयानन्द योगपीठ न्यास द्वारा वैदिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार, यज्ञ-संस्कारों की परम्परा को सुदृढ़ करने तथा योग्य, विद्वान्, संस्कारवान् एवं कर्मनिष्ठ आर्य पुरोहित/पुरोहिता तैयार करने के उद्देश्य से एकवर्षीय आर्य पुरोहित/पुरोहिता प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया जा रहा है।इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित व्यक्तियों का निर्माण करना है, जो…
आर्य समाज के सुदृढ़ीकरण एवं वेद-प्रचार की समग्र कार्ययोजना ========================================== १. सबसे पहले यह स्पष्ट हो—आर्य समाज का काम क्या है? इसलिए प्रत्येक आर्य समाज की कार्य-पुस्तिका में कम-से-कम ये क्षेत्र होने चाहिए— वेद-पाठ एवं वेद-प्रचार यज्ञ एवं संस्कार सत्यार्थ प्रकाश एवं वैदिक साहित्य का अध्ययन बाल एवं युवा निर्माण महिला जागरण एवं प्रशिक्षण पुरोहित…
सफलता, विस्तार और संगठन की ऊँचाई का मूल आधार कार्यकर्ताओं एवं प्रचारकों का नियमित प्रशिक्षण कोई भी संस्था या संगठन केवल अच्छे उद्देश्य निर्धारित कर लेने से सफल नहीं होता। उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए ऐसे कार्यकर्ताओं और प्रचारकों की आवश्यकता होती है, जो संस्था के उद्देश्य, विचार, कार्यपद्धति, अनुशासन, व्यवहार और नेतृत्व-कौशल…
महर्षि दयानन्द सरस्वती जी महाराज के निर्देश के आधार पर यज्ञों में एकरूपता लाने एवं यज्ञ विधि को सरलतापूर्वक करने कराने के लिए एक पुस्तक तैयार की गयी है जिसका नाम में “आदर्श दिनचर्या” ।यह पुस्तक शीघ्र ही समाज को समर्पित की जायेगी।
दूसरों की सम्पन्नता यदि आपक दुःख का कारण है तो समझ लो कि आप मानसिक रूप से बीमार हैं मनुष्य के जीवन में सुख और दुःख का सबसे बड़ा कारण बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उसकी अपनी मानसिक वृत्तियाँ हैं। संसार में कोई व्यक्ति धनवान है, कोई विद्वान है, कोई बलवान है और कोई प्रतिष्ठित है।…
सही दिशा के लिए निष्पक्ष चिन्तन आवश्यक है मनुष्य के जीवन में दो बातें अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं— 1. विचार (सोचना) 2. दिशा (उस विचार के आधार पर चलना) यदि विचार पक्षपातपूर्ण होगा, तो दिशा भी गलत होगी। यदि विचार निष्पक्ष होगा, तो दिशा भी सही होगी। इसलिए सही दिशा प्राप्त करने का पहला साधन है—निष्पक्ष…
समस्या नहीं, समाधान बनिए। वैदिक संस्कार अपनाइए, श्रेष्ठ समाज बनाइए। आज संसार अनेक प्रकार की समस्याओं से घिरा हुआ है। कहीं प्रदूषण है, कहीं भ्रष्टाचार है, कहीं हिंसा है, कहीं नशाखोरी है, कहीं परिवार टूट रहे हैं, तो कहीं युवा दिशाहीन हो रहे हैं। अधिकांश लोग इन समस्याओं की चर्चा तो करते हैं, उनकी आलोचना…
सही मूल्यांकन तो अपरिचितों द्वारा होता है परिचित या तो अधिक अंक देंगे या फिर कम। मनुष्य का सही मूल्यांकन करना अत्यन्त कठिन कार्य है। मूल्यांकन तभी निष्पक्ष माना जाता है जब उसमें न पक्षपात हो, न पूर्वाग्रह और न ही किसी प्रकार का व्यक्तिगत लगाव या विरोध। इसी कारण यह कहा जाता है कि…
आये थे फूल चुनने बाग़ ए हयात में दामन को जार-ए-ख़ार में उलझा के रह गये। बाग़-ए-हयात = जीवन रूपी बगीचा। फूल चुनना = जीवन के श्रेष्ठ गुण, ज्ञान, सदाचार, सफलता और आनंद को प्राप्त करना। दामन = अपना जीवन, चरित्र या व्यक्तित्व। ख़ार = काँटे, अर्थात् बुराइयाँ, मोह, लोभ, क्रोध, आलस्य, अहंकार और सांसारिक…