महर्षि दयानन्द योगपीठ
महर्षि दयानन्द योगपीठ
आर्य समाज के सुदृढ़ीकरण एवं वेद-प्रचार की समग्र कार्ययोजना
आर्य समाज के सुदृढ़ीकरण एवं वेद-प्रचार की समग्र कार्ययोजना ========================================== १. सबसे पहले यह स्पष्ट हो—आर्य समाज का काम क्या है? इसलिए प्रत्येक आर्य समाज की कार्य-पुस्तिका में कम-से-कम ये क्षेत्र होने चाहिए— वेद-पाठ एवं वेद-प्रचार यज्ञ एवं संस्कार सत्यार्थ प्रकाश एवं वैदिक साहित्य का अध्ययन बाल एवं युवा निर्माण महिला जागरण एवं प्रशिक्षण पुरोहित…
सफलता, विस्तार और संगठन की ऊँचाई का मूल आधार कार्यकर्ताओं एवं प्रचारकों का नियमित प्रशिक्षण
सफलता, विस्तार और संगठन की ऊँचाई का मूल आधार कार्यकर्ताओं एवं प्रचारकों का नियमित प्रशिक्षण कोई भी संस्था या संगठन केवल अच्छे उद्देश्य निर्धारित कर लेने से सफल नहीं होता। उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए ऐसे कार्यकर्ताओं और प्रचारकों की आवश्यकता होती है, जो संस्था के उद्देश्य, विचार, कार्यपद्धति, अनुशासन, व्यवहार और नेतृत्व-कौशल…
महर्षि दयानन्द योगपीठ प्रबन्धन
महर्षि दयानन्द योगपीठ प्रबन्धन आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ( योगाचार्य, वैदिक प्रवक्ता, लेखक एवं मिशनरी प्रचारक ) संस्थापक / अध्यक्ष / संचालक श्रीमती प्रेमा रानी कनवर ( पुरोहिता एवं योगाचार्या ) सचिव श्रीमती राम जयन्ती ‘निधि’ ( संगीताचार्या एवं भजनोपदेशिका ) कोषाध्यक्ष श्री महावीर वर्मा ( प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी ) संरक्षक सदस्य डॉ॰ नरेन्द्र अग्निहोत्री…
महर्षि दयानन्द सरस्वती
महर्षि दयानन्द सरस्वती जी महाराज के जीवन दर्शन को विस्तार से जानने के लिए वेबसाइट पर अध्ययन करें। जिसका लिंक निम्नलिखित है – http://www.maharshidayanand.com
कृण्वन्तो विश्वमार्यम् की मिशनरी योजना
कृण्वन्तो विश्वमार्यम् की मिशनरी योजना आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री मैंने अपने अध्ययन और प्रचार यात्रा में हुए अनुभवों के आधार पर महर्षि दयानन्द सरस्वती जी महाराज के मिशन को जितना समझा है और इस मिशन में कैसे सफलता मिलेगी, इसके लिए कुछ विचार आपके सामने रखने का प्रयास किया है। यदि ये विचार उपयोगी लगें तो…
महर्षि दयानन्द योगपीठ (न्यास) के उद्देश्य
1. महर्षि दयानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा निर्देशित कल्याणकारी वैदिक सिद्धान्तों को मानना व प्रचार करना इस न्यास का मुख्य उद्देश्य होगा। 2. सार्वभौम सुख एवं शान्ति के लक्ष्य को ध्यान में रख विश्व में वैदिक धर्म, वैदिक संस्कृति तथा वैदिक सभ्यता के आधार पर सर्वसाधारण तथा युवकों/युवतियों और बालक/बालिकाओं में उचित उपायों द्वारा वैदिक…
प्रचारक बनने के लिए आवश्यक नियम निर्देश
संसार का प्रथम गुरू, आचार्य और उपदेशक परमेश्वर है। परमेश्वर से ज्ञान प्राप्त करके मनुष्यों में यह मार्गदर्शन की श्रृंखला अग्नि, वायु, आदित्य और अङ्गिरा ऋषियों से आरम्भ हुई है।


