आप जो भी करें उसका दूरगामी परिणाम अवश्य ध्यान में रखें

आप जो भी करें उसका दूरगामी परिणाम अवश्य ध्यान में रखें

मनुष्य का प्रत्येक विचार, प्रत्येक शब्द और प्रत्येक कर्म भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति केवल यह नहीं सोचता कि आज क्या लाभ होगा, बल्कि यह भी विचार करता है कि उसके निर्णय का प्रभाव आने वाले दिनों, वर्षों और पीढ़ियों पर क्या पड़ेगा। जो व्यक्ति केवल तत्काल सुख या लाभ देखकर निर्णय लेता है, वह प्रायः बाद में पश्चात्ताप करता है; जबकि दूरदर्शी व्यक्ति पहले परिणामों पर विचार करता है और फिर कर्म करता है।

१. “कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो मे सव्य आहितः।”

भावार्थ : मनुष्य को अपने कर्म ऐसे करने चाहिए कि वे अन्ततः विजय, उन्नति और कल्याण के कारण बनें। सफलता केवल कर्म करने से नहीं, बल्कि विचारपूर्वक और धर्मानुकूल कर्म करने से प्राप्त होती है।

२. “विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु।”

भावार्थ : भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं— मैंने सम्पूर्ण विषय समझा दिया है; अब तुम भली-भाँति विचार करके जो उचित लगे, वही करो।

यह शिक्षा बताती है कि बिना विचार के नहीं, बल्कि परिणामों को समझकर निर्णय लेना चाहिए।

३. “सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।”

भावार्थ : जो व्यक्ति अपने विवेक और आत्मसंयम से निर्णय लेता है, वही सुखी रहता है। आवेश, लोभ या दूसरों के दबाव में किए गए कार्य प्रायः दुःखद परिणाम देते हैं।

४. महर्षि दयानन्द सरस्वती जी महाराज ने स्पष्ट कहा कि मनुष्य को ऐसा कर्म करना चाहिए जिससे स्वयं का और समस्त संसार का कल्याण हो। जो कार्य भविष्य में हानि, अधर्म या समाज के पतन का कारण बने, उसे त्याग देना चाहिए।

#दूरगामी_परिणामों_पर_विचार_क्यों_आवश्यक_है?

क्योंकि आज का एक निर्णय भविष्य की दिशा बदल सकता है।

क्योंकि एक छोटी भूल जीवनभर का दुःख बन सकती है।

क्योंकि श्रेष्ठ संस्कार आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करते हैं।

क्योंकि समाज का उत्थान और पतन व्यक्तियों के निर्णयों पर निर्भर करता है।

क्योंकि धर्म वही है जो दीर्घकाल में भी कल्याणकारी हो।

#जीवन_के_कुछ_उदाहरण

क्रोध में बोले गए कुछ शब्द वर्षों पुराने सम्बन्ध तोड़ सकते हैं।

थोड़े से लाभ के लिए किया गया बेईमानी का कार्य जीवनभर की बदनामी बन सकता है।

प्रतिदिन किया गया थोड़ा-सा अध्ययन भविष्य में महान विद्वत्ता का आधार बन जाता है।

प्रतिदिन का योग, यज्ञ और स्वाध्याय जीवनभर स्वास्थ्य, शान्ति और चरित्र का निर्माण करते हैं।

बच्चों को दिए गए संस्कार केवल उनका ही नहीं, पूरे समाज का भविष्य निर्धारित करते हैं।

दूरदर्शी व्यक्ति की पहचान

वह निर्णय लेने से पहले सोचता है।

वह केवल वर्तमान लाभ नहीं, भविष्य का हित देखता है।

वह अपने कर्मों का प्रभाव परिवार, समाज और राष्ट्र पर भी विचार करता है।

वह धर्म, न्याय और सत्य के आधार पर निर्णय लेता है।

वह क्षणिक सुख के लिए स्थायी हानि स्वीकार नहीं करता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!