आये थे फूल चुनने बाग़ ए हयात में
दामन को जार-ए-ख़ार में उलझा के रह गये।
बाग़-ए-हयात = जीवन रूपी बगीचा।
फूल चुनना = जीवन के श्रेष्ठ गुण, ज्ञान, सदाचार, सफलता और आनंद को प्राप्त करना।
दामन = अपना जीवन, चरित्र या व्यक्तित्व।
ख़ार = काँटे, अर्थात् बुराइयाँ, मोह, लोभ, क्रोध, आलस्य, अहंकार और सांसारिक आकर्षण।
जार-ए-ख़ार = काँटों का झुरमुट या जाल।
कवि कहना चाहता है कि मनुष्य इस संसार में श्रेष्ठ उद्देश्य लेकर आता है। उसका जन्म ज्ञान प्राप्त करने, चरित्र निर्माण करने, समाज की सेवा करने और परमात्मा की ओर अग्रसर होने के लिए हुआ है। किन्तु अधिकांश लोग जीवन के मार्ग में मिलने वाले मोह, लोभ, अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, व्यसनों और तुच्छ आकर्षणों में ऐसे उलझ जाते हैं कि अपने वास्तविक उद्देश्य को ही भूल बैठते हैं।
जिस प्रकार कोई व्यक्ति सुंदर बगीचे में फूल तोड़ने जाए और उसका वस्त्र काँटों में फँस जाए, तो वह फूल भी नहीं ले पाता और स्वयं भी परेशान हो जाता है; उसी प्रकार मनुष्य भी जीवन के बहुमूल्य अवसर को व्यर्थ के झंझटों में खो देता है।
1. विद्यार्थी का उदाहरण
एक विद्यार्थी विद्यालय में ज्ञान अर्जित करने जाता है। यदि वह पढ़ाई छोड़कर मोबाइल, खेल, सोशल मीडिया या गलत संगति में पड़ जाए, तो उसका समय नष्ट हो जाता है। वह ज्ञानरूपी फूल नहीं चुन पाता और बुराइयों के काँटों में उलझ जाता है।
2. किसान का उदाहरण
किसान खेत में अच्छी फसल उगाने के लिए परिश्रम करता है। यदि वह खेत की निराई-गुड़ाई न करे, तो खरपतवार पूरी फसल को नष्ट कर देती है। उसी प्रकार यदि मनुष्य अपने मन से दोषों को नहीं हटाता, तो वे उसके सद्गुणों का विकास रोक देते हैं।
3. व्यापारी का उदाहरण
एक व्यापारी ईमानदारी से व्यापार प्रारम्भ करता है। यदि वह अधिक धन के लोभ में बेईमानी करने लगे, तो कुछ समय लाभ मिल सकता है, परन्तु सम्मान, विश्वास और अन्तःशान्ति खो देता है। वह सफलता के फूल छोड़कर लोभ के काँटों में उलझ जाता है।
4. महाभारत से उदाहरण
दुर्योधन के पास राज्य, शक्ति और अवसर सब कुछ था, किन्तु ईर्ष्या और अहंकार ने उसे सत्य से दूर कर दिया। परिणामस्वरूप वह सब कुछ खो बैठा। दूसरी ओर पाण्डवों ने कठिनाइयाँ सहकर भी धर्म का साथ नहीं छोड़ा और अंततः विजय प्राप्त की।
5. दैनिक जीवन का उदाहरण
कई लोग स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं, किन्तु आलस्य, असंयम और बुरी आदतों के कारण रोगों से घिर जाते हैं। उनका लक्ष्य स्वास्थ्य था, पर वे असंयम के काँटों में उलझ गे।
यह सन्देश हमें सिखाता है कि—
जीवन का उद्देश्य कभी नहीं भूलना चाहिए।
तुच्छ आकर्षणों की अपेक्षा उच्च आदर्शों को अपनाना चाहिए।
समय का सदुपयोग करना चाहिए।
लोभ, मोह, क्रोध, अहंकार और आलस्य से बचना चाहिए।
सत्संग, स्वाध्याय, परिश्रम और संयम के द्वारा जीवन के फूल प्राप्त किए जा सकते हैं।
वेदों का संदेश है कि मनुष्य का जीवन केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान, धर्म, आत्मोन्नति और लोककल्याण के लिए है। यदि मनुष्य अपने विवेक का उपयोग करे, तो वह काँटों से बचते हुए जीवन रूपी बगीचे के सुगंधित फूल—सत्य, विद्या, सदाचार, सेवा, यश और ईश्वर की कृपा—प्राप्त कर सकता है।
यह सन्देश मानव जीवन का अत्यन्त मार्मिक चित्र प्रस्तुत करता है। हम सभी इस संसार में कुछ श्रेष्ठ करने, अपने जीवन को सार्थक बनाने और दूसरों के जीवन में सुख एवं प्रकाश फैलाने के लिए आए हैं। यदि हम अपने लक्ष्य से भटककर मोह, लोभ, क्रोध और व्यर्थ के विवादों में उलझ जाएँ, तो जीवन का अमूल्य अवसर नष्ट हो जाता है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने जीवन का लक्ष्य स्पष्ट रखें, विवेकपूर्वक चलें और जीवन-उपवन से सद्गुणों के सुगंधित फूल चुनकर अपने जीवन को सफल, सार्थक और समाजोपयोगी बनाएँ।


