महर्षि दयानन्द योगपीठ न्यास द्वारा ऋषि मिशन – कृण्वन्तो विश्वमार्यम् के लिए योजनाबद्ध निरन्तर किये जा रहे कार्य

🌍 महर्षि दयानन्द योगपीठ न्यास द्वारा ऋषि मिशन – कृण्वन्तो विश्वमार्यम् के लिए योजनाबद्ध निरन्तर किये जा रहे कार्य 🌎 नमस्ते जी 👉 महर्षि दयानन्द सरस्वती के द्वितीय जन्म शताब्दी वर्ष एवं आर्य समाज की स्थापना के १५० वें वर्ष के पावन अवसर पर महर्षि दयानन्द योगपीठ द्वारा जनपद आगरा के विभिन्न विद्यालयों में सामान्य…

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एस एस एल पब्लिक स्कूल फतेहाबाद आगरा में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम

एस एस एल पब्लिक स्कूल फतेहाबाद आगरा में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम महर्षि दयानन्द सरस्वती के द्वितीय जन्म शताब्दी वर्ष एवं आर्य समाज की स्थापना के १५० वें वर्ष के पावन अवसर पर महर्षि दयानन्द योगपीठ द्वारा जनपद आगरा के विभिन्न विद्यालयों में सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन किया गया जिसमें कक्षा ४ से लेकर…

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आर्य समाज के कार्य को गति देने के लिए व्यवस्थित कार्य योजना

आर्य समाज के कार्य को गति देने के लिए व्यवस्थित कार्य योजना ०- संगठन के कार्य को व्यवस्थित रूप से करने के लिए निर्वाचित प्रधान, मन्त्री और कोषाध्यक्ष मिलकर वरिष्ठ आर्य सभासदों की देखरेख में एक कार्यकारिणी बनायें। कार्यकारिणी में कार्य करने में सक्षम आर्य सभासद हों। सदस्य कम या अधिक होने पर सहायक पदों…

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यज्ञ, वेद प्रचार कार्यक्रम और उत्सव आदि सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश

यज्ञ, वेद प्रचार कार्यक्रम और उत्सव आदि सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश होम ( अग्निहोत्र ) के लिए आवश्यक सामग्री – होम के द्रव्य चार प्रकार (प्रथम-सुगन्धित) कस्तूरी, केशर, अगर, तगर, श्वेतचन्दन, इलायची, जायफल, जावित्री आदि (द्वितीय-पुष्टिकारक) घृत, दूध, फल, कन्द, अन्न, चावल, गेहूं, उड़द, आदि। (तीसरे-मिष्ट) शक्कर, सहत, छुवारे, दाख आदि। (चौथे-रोगनाशक) सोमलता…

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सैद्धान्तिक प्रवचन

सैद्धान्तिक प्रवचन आचार्य  हरिशंकर अग्निहोत्री                 ( वैदिक प्रवक्ता)         हम नियमित रुप से सैद्धान्तिक चर्चा आरम्भ कर रहे हैं। जो तर्क और प्रमाणों पर आधारित होगी। यदि आपको इस चर्चा में कोई प्रश्न उपस्थित हो तो अवश्य रखने की कृपा करेंगें। हमारा उद्देश्य केवल और केवल सत्य सिद्धान्तों का प्रचार करना है किसी के दिल को…

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आर्य समाज के नियम – उपनियम

आर्य समाज के दस नियम १. सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदि मूल परमेश्वर है । २. ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करनी योग्य है ।…

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आर्य वीर दल के जिला संचालकों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश

संगठन के कार्य को गति देने के लिए व्यवस्थित कार्य योजना १- संगठन के कार्य को व्यवस्थित रूप से करने के लिए पूरे जनपद के कर्मठ आर्य जनों की एक कार्यकारिणी बनायें। जिसमें आर्य वीर दल और आर्य समाजों के द्वारा प्रशिक्षित वैदिक सिद्धान्तों को जानने और मानने वाले हों। जनपद कार्यकारिणी का प्रारूप निम्नलिखित…

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