बार बार लक्ष्य मत बदलो नहीं तो कुछ हाथ नहीं लगेगा
मनुष्य के जीवन की सफलता का सबसे बड़ा आधार है—स्पष्ट लक्ष्य और उसके प्रति निरन्तर समर्पण। जिस व्यक्ति का लक्ष्य बार-बार बदलता रहता है, उसकी ऊर्जा, समय और प्रतिभा बिखर जाती है। वह प्रत्येक कार्य का आरम्भ तो करता है, किन्तु किसी भी कार्य को पूर्णता तक नहीं पहुँचा पाता। परिणामस्वरूप वर्षों की मेहनत के बाद भी उसके हाथ में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं आती।
1. लक्ष्य जीवन को दिशा देता है
जिस प्रकार बिना पतवार की नाव समुद्र में भटकती रहती है, उसी प्रकार बिना स्थिर लक्ष्य का मनुष्य जीवन में इधर-उधर भटकता रहता है। लक्ष्य ही हमारे विचार, समय और कर्म को सही दिशा देता है।
2. बार-बार लक्ष्य बदलना असफलता का कारण है
कुछ कठिनाई आते ही यदि व्यक्ति अपना लक्ष्य बदल दे, तो वह कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। हर नया लक्ष्य फिर से शून्य से प्रारम्भ करवाता है। इस प्रकार समय तो बीतता जाता है, परन्तु मंज़िल दूर ही रहती है।
3. सफलता धैर्य और निरन्तरता से मिलती है
बीज बोने के बाद प्रतिदिन उसे खोदकर देखने से पौधा नहीं उगता। उसी प्रकार लक्ष्य भी समय, धैर्य, परिश्रम और निरन्तर अभ्यास से प्राप्त होता है।
4. कठिनाइयाँ लक्ष्य बदलने का नहीं, स्वयं को बदलने का संकेत हैं
मार्ग में आने वाली बाधाएँ यह नहीं कहतीं कि लक्ष्य छोड़ दो; वे यह सिखाती हैं कि अपनी तैयारी, कार्यपद्धति और पुरुषार्थ को और श्रेष्ठ बनाओ।
5. एकाग्रता से शक्ति बढ़ती है
जब मनुष्य एक ही लक्ष्य पर अपना सम्पूर्ण ध्यान केन्द्रित करता है, तब उसकी मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक शक्तियाँ एक दिशा में कार्य करती हैं। यही एकाग्रता असाधारण सफलता का कारण बनती है।
6. महान व्यक्तियों ने लक्ष्य नहीं बदला
महर्षि दयानन्द सरस्वती ने वैदिक धर्म के पुनर्जागरण का लक्ष्य निर्धारित किया। अनेक विरोध, कष्ट और षड्यन्त्रों के बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं बदला। उसी दृढ़ता ने उन्हें युगप्रवर्तक बना दिया।
7. आकर्षणों से सावधान रहें
दूसरों की सफलता देखकर बार-बार अपना क्षेत्र बदलना बुद्धिमानी नहीं है। हर क्षेत्र में संघर्ष है। जो व्यक्ति हर चमकती वस्तु के पीछे दौड़ता है, वह अन्ततः खाली हाथ रह जाता है।
8. लक्ष्य बदलने से पहले आत्ममंथन करें
यदि लक्ष्य वास्तव में अनुचित, अनैतिक या असम्भव सिद्ध हो रहा हो, तभी गम्भीर विचार के बाद परिवर्तन करें। केवल ऊब, भय या अस्थायी कठिनाइयों के कारण लक्ष्य बदलना उचित नहीं है।
9. छोटे-छोटे चरणों में आगे बढ़ें
बड़े लक्ष्य एक दिन में पूरे नहीं होते। उन्हें छोटे-छोटे कार्यों में बाँटकर नियमित रूप से आगे बढ़ना चाहिए। प्रत्येक छोटी सफलता बड़े लक्ष्य के निकट ले जाती है।
10. सफलता उसी की होती है जो डटा रहता है
इतिहास गवाह है कि महान उपलब्धियाँ उन्हीं लोगों को मिली हैं जिन्होंने कठिनाइयों के सामने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर अटल रहे।


