वासन्ती नवसस्येष्टि ( होलकोत्सव )
वासन्ती नवसस्येष्टि ( होलकोत्सव ) ऋतुराज वसन्त विराज रहा, मनभावन है छवि छाज रहा। बन-बागन में कुसुमावलि की, सुखदा सुषमा वह साज रहा ॥ यव गेहुँ चना सरसों अलसी, सब ही पक आज अनाज रहा। यह देख मनोहर दृश्य सभी, अति हर्षित होय समाज रहा ॥ उपलक्ष्य इसे करके जग में, शुभ होलक-उत्सव हैं करते। …


